Wednesday, September 16, 2026
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Madhya Pradesh

संबल योजना बनी गुड्डी बाई का सहारा

संबल योजना बनी गुड्डी बाई का सहारा

संबल योजना बनी गुड्डी बाई का सहारा

जीवन में कई बार विपरीत परिस्थितियाँ आकर हमें तोड़ने की कोशिश करती हैं, लेकिन सही समय पर मिला सहारा नई राह दिखा सकता है। ऐसी ही एक कहानी है, उमरिया जिले के गांव कछरवार की रहने वाली गुड्डी बाई की, जिनके परिवार को मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना ने न केवल सहारा दिया, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य को भी सुरक्षित किया।

गुड्डी बाई के जीवन में पहली चुनौती 15 साल पहले आई जब उनके पति हेतराम का निधन हुआ। परिवार का सहारा बनने की जिम्मेदारी उनके बड़े बेटे प्रभाकर रजक ने संभाली। प्रभाकर ने इलेक्ट्रिशियन का काम शुरू किया और घर-परिवार को आर्थिक रूप से स्थिरता दी। लेकिन किस्मत ने एक और परीक्षा ली, प्रभाकर की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई। इस घटना ने परिवार को आर्थिक और भावनात्मक रूप से तोड़ दिया। जीविकोपार्जन के लिए छोटे बेटे सुधाकर ने इलेक्ट्रिशियन का काम सीखना शुरू किया और बड़े बेटे दिवाकर ने खेती-बाड़ी का जिम्मा संभाला।

संबल योजना ने दी नई ऊर्जा

प्रभाकर का नाम मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना 2.0 में पंजीकृत था। उनकी मृत्यु के बाद योजना के तहत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगल क्लिक से 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि गुड्डी बाई के खाते में जमा कराई। इस राशि ने न केवल परिवार को आर्थिक संकट से उबारा, बल्कि उनके बच्चों के भविष्य को संवारने का अवसर भी दिया।

गुड्डी बाई कहती हैं, “यह राशि हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब मैं अपने बच्चों की पढ़ाई और उनके काम-धंधे को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकती हूँ। यह सहायता हमें फिर से जीने की ताकत दे रही है।” गुड्डी बाई ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जैसे असहाय परिवारों को फिर से अपने पैरों पर खड़े होने का मौका दिया है। संबल योजना से न केवल आर्थिक सहायता दी, बल्कि एक टूटे हुए परिवार को फिर से खड़ा करने की प्रेरणा दी।