एम्स भोपाल और डीआरडीओ-डीआईपीएएस के बीच समझौता
चिकित्सा एवं रक्षा शरीर क्रिया विज्ञान अनुसंधान को नई दिशा देने की दिशा में एम्स भोपाल और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की प्रमुख प्रयोगशाला डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेज (डीआईपीएएस) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर एम्स भोपाल की ओर से कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर तथा डीआईपीएएस की ओर से निदेशक श्री देवकान्त पहाड़ सिंह ने हस्ताक्षर किए।
समारोह का आयोजन एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर डीन (अनुसंधान) डॉ. रेहान-उल-हक, शरीर क्रिया विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष वाकोडे तथा विभाग के वरिष्ठ संकाय सदस्य उपस्थित रहे। डीआईपीएएस की ओर से वरिष्ठ वैज्ञानिकों सहित छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
इस सहयोग का उद्देश्य अत्यधिक ऊँचाई, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों तथा युद्ध जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्यरत सैनिकों के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता और प्रदर्शन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान विकसित करना है। इसके अंतर्गत सैनिकों के प्रदर्शन में सुधार, व्यक्तिगत शारीरिक प्रोफाइल के आधार पर हस्तक्षेप विकसित करना तथा स्वदेशी बायोमेडिकल तकनीकों का विकास प्रमुख लक्ष्य होंगे।
बैठक के दौरान उच्च पर्वतीय एवं अत्यधिक वातावरणीय शरीर क्रिया विज्ञान, संज्ञानात्मक तंत्रिका विज्ञान एवं तनाव प्रबंधन, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एवं पहनने योग्य तकनीक तथा मानव मापिकी एवं एर्गोनॉमिक डिज़ाइन जैसे महत्वपूर्ण अनुसंधान क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई। एम्स भोपाल के शरीर क्रिया विज्ञान विभाग ने अपनी उन्नत अनुसंधान सुविधियों का प्रस्तुतीकरण किया। विभाग की न्यूरोफिजियोलॉजी एवं रिपिटेटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिम्युलेशन (आरटीएमएस), स्वायत्त तंत्रिका कार्य एवं हृदय स्वास्थ्य, एर्गोनॉमिक्स एवं शारीरिक प्रदर्शन, संवेदी एवं तंत्रिका मूल्यांकन तथा फेफड़ों एवं चयापचय संबंधी प्रोफाइलिंग जैसी विशेषज्ञताओं को डीआईपीएएस की अनुसंधान आवश्यकताओं के अनुरूप पाया गया।
डीआईपीएएस के वैज्ञानिकों ने एम्स भोपाल की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने फिजियोलॉजी प्रयोगशाला, कम्प्यूटेशनल 3डी मॉडलिंग एवं बायोमैकेनिक्स प्रयोगशाला तथा फ्लोरेसेंस-एक्टिवेटेड सेल सॉर्टिंग (एफएसीएस) प्रयोगशाला का अवलोकन कर वहाँ उपलब्ध उन्नत अनुसंधान अवसंरचना एवं अत्याधुनिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
