टेक्नालॉजी और एआई का उपयोग मानवीय निगरानी और डेटा सुरक्षा मे हो – जस्टिस अशोक भूषण
इंदौर। लोक अदालत द्वारा विवादों का निपटारा करने वाले संस्थानों (एडीआर) में स्वतंत्रता, निष्पक्षता, गोपनीयता और संस्थागत विश्वास महत्वपूर्ण है और यह पहल समय के अनुरूप है। टेक्नोलॉजी और एआई का उपयोग मानवीय निगरानी, पारदर्शिता, निष्पक्षता और डेटा सुरक्षा के साथ होना चाहिए।
यह बात सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एवं पूर्व अध्यक्ष जस्टिस अशोक भूषण ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली में आयोजित डिजिटल कर्टेन रैजर के माध्यम से सामंजस्य आर्बिट्रेशन, मीडिएशन एंड ओडीआर (ऑनलाइन डिस्प्यूट रिजोलूशन) कौंसिल का अनावरण करते हुए कही।
नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. जीएस वाजपेयी ने कहा कि एडीआर को अदालतों के विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक विवाद-समाधान व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए, जहां प्रत्येक विवाद के लिए उसकी प्रकृति के अनुरूप उचित प्रक्रिया का चयन हो। उन्होंने इस मामले में इनफॉर्मड चॉइस को प्रमुख सिद्धांत बताया।
एनएलयू की रजिस्ट्रार डॉ. रिशम गर्ग ने सामंजस्य (सहमति से समाधान, समाधान से सामंजस्य) को मीडिएशन, ऑर्बिट्रेशन और टेक्नोलॉजी के समयानुकूल संगम के रूप में देखते हुए आशा व्यक्त की कि यह एनएलयू के विद्यार्थियों और फैकल्टी के लिए भी हमेशा अकादमिक एवं व्यवसायिक सहभागिता का मंच बनेगा।
यह जानकारी देते हुए ग्वालियर के अधिवक्ता एवं सामंजस्य ओडीआर के संस्थापक प्रिंस पवैया ने कहा कि यह पहल ऑर्बिट्रेशन, मीडिएशन, कंसिलिएशन और ओडीआर के लिए एक आधुनिक, पेशेवर और टेक्नोलॉजी-सक्षम संस्थागत मंच विकसित करने की दिशा में कार्य करेगी। सामंजस्य ओडीआर को एनएलयू दिल्ली फाउंडेशन के तत्वाधान में इंक्युबेट किया गया है और इसे नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।
सामंजस्य ओडीआर में डिजिटल फाइलिंग, नोटिस, सुरक्षित दस्तावेज़, आदान-प्रदान, न्यूट्रल्स की नियुक्ति, ऑनलाइन मीडिएशन एवं सुनवाई, केस ट्रैकिंग, सेटलमेंट और अवॉर्ड तक एंड-टू-एंड डिजिटल डिस्प्यूट-रिज़ॉल्यूशन इकोसिस्टम विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
संस्था भविष्य में बैंकिंग एवं एनबीएफसी, इंश्योरेंस, एमएसएमई, कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों, एसोसिएशनों और सार्वजनिक निकायों जैसे क्षेत्रों के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक डिस्प्यूट-रिज़ॉल्यूशन फ्रेमवर्क्स विकसित करने की दिशा में भी कार्य करेगी, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहाँ बड़ी संख्या में विवादों के कारण पारंपरिक प्रक्रिया में अधिक समय और लागत लग सकती है।
कार्यक्रम में न्यायपालिका, बार, अकादमी और विधिक जगत के सदस्य उपस्थित रहे।
