विद्यार्थी राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें और भारत को एक गौरवशाली राष्ट्र बनायें – मंत्री परमार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे है
मंत्री परमार ने एसजीएसआईटीएस परिसर इंदौर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति का अनावरण किया
उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदरसिंह परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगातार गुणवत्ता, नवाचार और शोध को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति भारतीयता से ओत-प्रोत है, इसमें आध्यानत्म और विज्ञान का अद्भूत समन्वय है। यह हमें आत्मनिर्भर बना रही है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है। इंदौर का एसजीएसआईटीएस कॉलेज एक ऐसा प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थान है, जहाँ के अध्ययनरत छात्र-छात्राओं ने देश और विदेश में इंदौर का मान बढ़ाया है। इस संस्थान में अध्ययन करना स्वयं को गौरवान्वित करना है। आज यहाँ जो छात्र-छात्राएं अध्ययन कर रहे है, वे सौभाग्यशाली है। मंत्री परमार बुधवार को इंदौर के एसजीएसआईटीएस कॉलेज में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों हेतु उद्भव-2026 (ज्ञान का संचार) कार्यक्रम में उपस्थित छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में एसजीएसआईटीएस कॉलेज के पूर्व छात्र पद्मश्री प्रो. डी. बी. फाटक, खासगी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री यशवंत राव होलकर तृतीय, सक्से्रिया महाराज के वंशज नंदू सक्सेरिया, एसजीएसआईटीएस के निदेशक नितेश पुरोहित विशेष रूप से उपस्थित थे।
मंत्री परमार ने कहा कि एसजीएसआईटीएस कॉलेज के लिए यह गर्व की बात है कि यह संस्थान अगले वर्ष अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूर्ण करने जा रहा है। वर्ष-2047 में भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूर्ण करेगा। यह पीढ़ी वर्ष-2047 में भारत को विकसित भारत के रूप में देखेंगी। मंत्री परमार ने विद्यार्थियों को आह्वान किया कि वे राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें और एक ऐसा गौरवशाली राष्ट्र बनायें, जिसमें समाज का अंतिम व्यक्ति भी स्वयं खुश समझें। एसजीएसआईटीएस कॉलेज एक ऐसा तकनीकी शिक्षा संस्थान है, जहाँ विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन, मर्यादा और जीवन मूल्य भी सिखाये जाते है। हमारे विद्यार्थियों को राष्ट्र की समस्याओं का समाधान करना है। उन्होंने कहा कि भारत में 4 हजार साल पहले इंजीनियरिं ग की शिक्षा दी जाती थी, जिसके कई प्रमाण मौजूद है, इस पर हमें गर्व करना चाहिए। हमारे पूर्वजों ने जो ज्ञान दिया है, उसको आज समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में केवल हिंदी ही नहीं तमिल, तेलुगु, गुजराती, पंजाबी आदि भारतीय भाषाओं में पढ़ाई करायी जाएगी। ताकि यदि कोई विद्यार्थी दूसरे राज्यों में अध्ययन और रोजगार के लिए जाये तो उसे वहाँ असुविधा नहीं हो। भाषाएं राष्ट्र को जोड़ने का कार्य करती है, तोड़ने का नहीं, इसलिए मध्यप्रदेश में सभी भारतीय भाषाओं का अध्ययन करने की व्यवस्था की जा रही है। कार्यक्रम में मंत्री परमार एवं अतिथियों ने एसजीएसआईटीएस परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति का अनावरण किया।
कार्यक्रम में उपस्थित खासगी ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री यशवंत राव होलकर तृतीय ने कहा कि लोकमाता देवी अहिल्या बाई होलकर एक कुशल शासिका थी। उन्होंने अपने शासनकाल में मंदिर, मठ, धर्मशाला, कुएं, बावड़ी आदि कल्याणकारी विकास कार्य किए। आज का इंदौर देवी अहिल्याबाई के ही नाम से जाना जाता है। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे मन लगाकर अध्ययन करें और इस संस्थान का नाम पूरी दुनिया में फैलायें।
पद्मश्री प्रो. डी.बी. फाटक ने सभी विद्यार्थियों को अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एसजीएसआईटीएस संस्थान ने देश और दुनिया को ऐसे कई रत्न दिये है, जिस पर जितना गर्व करें, उतना कम है। आपको भी उसी श्रेणी में शामिल होना है। मंत्री परमार ने झाबुआ पोलिटेक्निक कॉलेज के इंटर्नशिप विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और उन्हें प्रमाणपत्र वितरित कर सामूहिक चित्र खिंचवायें। कार्यक्रम का संचालन प्रो. निधि ओसवाल ने किया।
