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July 14, 2026 (Last updated: July 14, 2026) 1 minute read
स्किल्ड युवाओं की जरूरत है समाज को : डॉ. रजनीश
15 जुलाई को कौशल उन्नयन दिवस पर विशेष
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 अस्तित्व में आते ही भारत में मैकाले की डिग्री शिक्षा के स्थान पर कौशल उन्नयन ने जगह बना ली है। वर्षों से डिग्री शिक्षा ने बेरोजगारों की फौज खड़ी की है। उनके हाथों में उच्च अंकों की मार्कशीट तो जरूर है लेकिन उनके पास कोई स्कील नहीं होने के कारण वे स्वयं को किसी खास ट्रेड में दक्ष नहीं कर पा रहे हैं। इस दृश्य को देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समझा और करीब साढ़े तीन दशक बाद शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन कर शिक्षा को कौशल से जोड़ कर युवाओं में आत्मविश्वास का संचार किया है। मध्यप्रदेश की चर्चा करें तो हमने भी कौशल उन्नयन में केन्द्र सरकार की अनुगामी बनकर युवाओंं को स्कील से जोडक़र उज्जवल भविष्य दे सकें। उन्हें निराशा और कुंठा से बाहर निकाल सकें। यही कारण है कि हम प्रत्येक वर्ष की 15 जुलाई को कौशल उन्नयन दिवस मनाते हैं। इसके पीछे का उद्देश्य है कि युवाओं को प्रेरित करें कि वे अक्षर ज्ञान से आगे निकल कर स्वयं को स्कील्ड बनाएं। ये नए भारत के युवा हैं जिनके पास शिक्षा के साथ स्कील है और जो नौकरी के मोहताज नहीं बल्कि स्वयं कुछ कर दिखाने के लिए बेताब हैं। बदलती दुनिया और नई जरूरतें आज के दौर तकनीक का है। आपने ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ या रोबोट जैसी चीजों के बारे में जरूर सुना होगा। मोबाइल ऐप और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर हर दिन बदल रहे हैं। ऐसे में जो काम लोग पहले हाथों से या पुराने तरीकों से करते थे, वे अब कंप्यूटर से चुटकियों में हो जाते हैं। इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि नौकरियां खत्म हो रही हैं, बल्कि इसका मतलब यह है कि नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है। अब पुराने ढर्रे पर बैठकर काम नहीं चलाया जा सकता। हर साल ‘कौशल उन्नयन दिवस’ मनाने का सीधा मकसद यही है कि हम अपनी पुरानी सोच को बदलें और यह समझें कि आज के दौर में केवल किताबी ज्ञान काफी नहीं है, बल्कि हाथों में कोई न कोई हुनर होना सबसे ज्यादा जरूरी है। डिग्री और हुनर का फर्क साधारण शब्दों में कहें तो डिग्री आपको यह बताती है कि आपने क्या पढ़ा है, लेकिन कौशल यह तय करता है कि आप क्या ‘कर’ सकते हैं। पुराने समय में माना जाता था कि अगर किसी ने अच्छे नंबरों से बीए, बीएससी या इंजीनियरिंग कर ली, तो उसकी जिंदगी संवर गई। लेकिन आज समय बदल चुका है। कंप्यूटर और इंटरनेट के आने से काम करने के तरीके पूरी तरह बदल गए हैं। आज कंपनियों को ऐसे लोगों की जरूरत है जो तुरंत काम संभाल सकें, जिन्हें कंप्यूटर चलाना आता हो, जो अच्छी बातचीत जिसे कम्युनिकेशन स्कील कहते हैं, कर सकें। अगर आपके पास डिग्री है लेकिन काम की व्यावहारिक समझ नहीं है, तो आज के बाजार में टिकना मुश्किल है। हम खुद को समय के साथ अपडेट नहीं करेंगे, तो हम पीछे छूट जाएंगे, ठीक वैसे ही जैसे आज के दौर में कीपैड वाले पुराने मोबाइल फोन पीछे छूट गए हैं। हर वर्ग के लिए जरूरी है हुनर कौशल विकास का मतलब सिर्फ कंप्यूटर सीखना या दफ्तर में काम करना नहीं है। जब गांव या शहर की महिलाएं सिलाई-कढ़ाई, अचार-पापड़ बनाने, ब्यूटी पार्लर चलाने या डिजिटल पैमेंट संभालने का हुनर सीखती हैं, तो वे अपने पैरों पर खड़ी होती हैं। इससे पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरती है। एक साधारण दुकानदार भी अगर ऑनलाइन पेमेंट लेना, सोशल मीडिया पर अपने सामान का प्रचार करना सीख ले, तो उसका व्यापार कई गुना बढ़ जाता है। यह भी कौशल उन्नयन का ही एक हिस्सा है। ‘स्किल इंडिया’ जैसी कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जहां मुफ्त या बहुत कम फीस में अलग-अलग काम सिखाए जाते हैं। लेकिन अभी भी हमारे समाज में एक बड़ी कमी है—हम शारीरिक श्रम या तकनीकी काम (जैसे प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, मैकेनिक) को क्लर्क या दफ्तर की नौकरी से छोटा समझते हैं। हमें इस मानसिकता को बदलना होगा। दुनिया के विकसित देशों (जैसे जर्मनी या जापान) में हुनरमंद लोगों को सबसे ज्यादा सम्मान और पैसा मिलता है। जब तक हम हुनर की इज्जत करना नहीं सीखेंगे, तब तक हम पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं बन पाएंगे। इस संदर्भ में यह बताना जरूरी है कि जान लें कि मध्यप्रदेश में क्या कुछ हो रहा है। पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल शिक्षार्थियों के लिए एक इंटरैक्टिव सीखने का माहौल बनाता है और जुनून पैदा करता है व्यावसायिक शिक्षा. यह विभिन्न माध्यमों से रुचियों और प्रतिभाओं को विकसित करने के अवसर भी प्रदान करता है पाठ्येतर गतिविधियां। प्रत्येक कक्षाओं और प्रयोगशाला को विशेष सुविधाओं के साथ बनाया गया है विभिन्न व्यावसायिक विषयों के प्रशिक्षुओं के लिए ताकि वे जानकारी और व्यावहारिक कौशल हासिल कर सकें उनके चुने हुए क्षेत्र। कहने का अर्थ यह कि हम युवाओं को कौशलपूर्ण बनाने का उपक्रम करते हैं। र् कौशल उन्नयन कोई मुश्किल या भारी-भरकम सरकारी नीति नहीं है, बल्कि यह हर आम इंसान की जरूरत है। यह हमें सिखाता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। चाहे आप छात्र हों, नौकरीपेशा हों या घरेलू महिला—हर दिन कुछ नया सीखने की आदत डालिए। आपकी डिग्री सिर्फ एक कागज का टुकड़ा बनकर रह सकती है, लेकिन आपका हुनर एक ऐसी चाबी है जो सफलता के बंद दरवाजों को भी खोल सकती है। आइए, इस कौशल उन्नयन दिवस पर हम सब यह संकल्प लें कि हम अपने भीतर छिपे हुनर को पहचानेंगे और उसे और बेहतर बनाएंगे। (लेखिका पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल में सहायक ग्रंथालय हैं)