मध्य प्रदेश में सरकारी खरीदी पर गंभीर सवाल, ₹1,134 करोड़ के खर्च की निष्पक्ष जांच हो: आम आदमी पार्टी
इंदौर। आम आदमी पार्टी, इंदौर ने मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी को लेकर समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के आधार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खबरों में सामने आए आंकड़े सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता, बाजार दरों से तुलना, निविदा प्रक्रिया और सार्वजनिक धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
22 और 23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित खबरों के अनुसार, प्रदेश के 374 नगरीय निकायों द्वारा तीन वर्षों में जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से लगभग ₹1,134 करोड़ की खरीदी किए जाने और कुछ वस्तुओं की खरीद दरों में बड़े अंतर के आरोप सामने आए हैं। खबरों में एक कचरा वाहन की लगभग ₹2 लाख और ₹6 लाख की खरीद दरों की तुलना, 200 एलईडी बल्बों की ₹60 लाख में खरीद की शिकायत तथा इंदौर नगर निगम द्वारा तीन साइन बोर्ड पर ₹24.72 लाख खर्च किए जाने जैसे मामलों का उल्लेख किया गया है।
इन खबरों में किए गए दावे अपने आप में किसी अनियमितता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं। हालांकि, यदि खरीद दरों, वस्तुओं की गुणवत्ता, आपूर्ति और भुगतान में अंतर पाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है। इसलिए आम आदमी पार्टी मांग करती है कि इन सभी मामलों की दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
आम आदमी पार्टी की प्रमुख मांगें
- ₹1,134 करोड़ की खरीदी की समीक्षा: प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में पिछले तीन वर्षों की जेम पोर्टल से हुई खरीदी का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
- बाजार दरों से तुलना: कचरा वाहनों, एलईडी बल्बों, साइन बोर्ड और अन्य सामग्रियों की खरीद दरों की समान गुणवत्ता एवं समान विनिर्देशों वाली वस्तुओं की बाजार दरों से तुलना की जाए।
- इंदौर नगर निगम के खर्च की जांच: तीन साइन बोर्ड पर ₹24.72 लाख खर्च किए जाने संबंधी प्रकाशित रिपोर्ट की निविदा, कार्यादेश, बिल, भुगतान और वास्तविक स्थापना के आधार पर जांच हो।
- सप्लायर और निविदा प्रक्रिया की जांच: संबंधित फर्मों की पात्रता, प्रतिस्पर्धी निविदाओं, अनुबंधों, आपूर्ति रिकॉर्ड और भुगतान की जांच की जाए। जहां आवश्यक हो, संभावित हितों के टकराव की भी पड़ताल हो।
- जवाबदेही तय हो: जांच में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए तथा सरकारी धन की हानि प्रमाणित होने पर उसकी वसूली की प्रक्रिया अपनाई जाए।
- जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो: सरकार जांच की समयसीमा तय करे और निष्कर्षों को सार्वजनिक करे, ताकि नागरिकों को पता चले कि उनके टैक्स का पैसा किस प्रकार खर्च किया गया।
जनता के पैसे का हिसाब देना सरकार की जिम्मेदारी
आम आदमी पार्टी का स्पष्ट मत है कि नगर निगम और नगरीय निकायों का बजट जनता की मेहनत की कमाई से बनता है। इस धन का उपयोग जनसुविधाओं, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, सड़कों और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए। सरकारी खरीदी में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक तंत्र का दायित्व है।
पार्टी ने मांग की है कि सरकार इन समाचार रिपोर्टों को गंभीरता से लेते हुए केवल बयान देने तक सीमित न रहे, बल्कि खरीद से संबंधित मूल रिकॉर्ड की जांच कराए। जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा; लेकिन सवालों का जवाब देना और तथ्यों को सार्वजनिक करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
प्रदेश सरकार सरकारी खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करे, जांच की समयसीमा घोषित करे और जनता के पैसे के हर रुपये का हिसाब सार्वजनिक करे।






