Monday, September 14, 2026
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Madhya Pradesh

जनधन योजना में मध्य प्रदेश ने बनाई मजबूत पहचान, 3.54 करोड़ रुपे कार्ड जारी

जनधन योजना में मध्य प्रदेश ने बनाई मजबूत पहचान, 3.54 करोड़ रुपे कार्ड जारी

जनधन योजना में मध्य प्रदेश ने बनाई मजबूत पहचान, 3.54 करोड़ रुपे कार्ड जारी

जनधन खातों, माइक्रो-एटीएम और बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट नेटवर्क के विस्तार से राज्य में वित्तीय समावेशन को मिल रही है मजबूती

मध्य प्रदेश: प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) के तहत जारी 3.54 करोड़ रुपे कार्ड के साथ मध्य प्रदेश ने देश में चौथा स्थान हासिल किया है। यह राज्य में वित्तीय समावेशन और डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते विस्तार को दर्शाता है।

मध्य प्रदेश में जनधन योजना के लाभार्थियों को अब तक 3.54 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इस सूची में उत्तर प्रदेश – 7.16 करोड़, बिहार – 4.98 करोड़ और पश्चिम बंगाल – 3.74 करोड़ रुपे कार्ड के साथ पहले तीन स्थानों पर हैं।

मध्य प्रदेश ने रुपे कार्ड जारी करने के मामले में महाराष्ट्र (2.75 करोड़) और राजस्थान (2.88 करोड़) जैसे राज्यों से बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं, पूरे देश में प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत अब तक करीब 41 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

राज्य में प्रधानमंत्री जनधन योजना के खातों की संख्या बढ़कर 3.70 करोड़ हो गई है। इससे साफ है कि अब ज्यादा से ज्यादा लोग बैंकिंग सेवाओं से जुड़ रहे हैं।

इस सफलता में बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट (BC) केंद्रों और माइक्रो-एटीएम का बड़ा योगदान है। इन केंद्रों के जरिए लोग अपने गांव में ही नकद जमा और निकासी, बैलेंस चेक, सरकारी योजनाओं का पैसा और अन्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ आसानी से ले सकते हैं।

पहले अलीराजपुर, सिंगरौली, मुरैना और छिंदवाड़ा जैसे दूर-दराज के इलाकों के लोगों को बैंक जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था। अब गांव में लगे माइक्रो-एटीएम के कारण बैंकिंग सेवाएं उनके घर के पास ही उपलब्ध हैं।

बीएलएस ई-सर्विसेज का मध्य प्रदेश में 1,600 से अधिक BC-CSP केंद्र और 600 से अधिक माइक्रो-एटीएम का नेटवर्क है। इनके माध्यम से हर महीने लगभग 8 लाख से अधिक लेनदेन किए जाते हैं, जिनकी कुल राशि करीब 400 करोड़ रुपये होती है।

ग्रीन पिन सुविधा से ग्राहक अब अपने रुपे कार्ड का पिन मोबाइल या डिजिटल माध्यम से आसानी से बना या बदल सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को पिन मिलने में होने वाली देरी की समस्या भी खत्म हो गई है।

बीएलएस ई-सर्विसेज के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) लोकनाथ पांडा ने कहा, “मध्य प्रदेश का देश में चौथे स्थान पर पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि राज्य में वित्तीय समावेशन तेजी से बढ़ रहा है।”

उन्होंने कहा, “माइक्रो-एटीएम और BC केंद्रों के विस्तार से लोगों को अपने गांव या उसके आसपास ही बैंकिंग सेवाएं मिल रही हैं। अब उन्हें पैसे निकालने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती।”

प्रधानमंत्री जनधन योजना के खाते पेंशन, सब्सिडी और अन्य सरकारी लाभ सीधे प्राप्त करने का प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। रुपे कार्ड, आधार आधारित भुगतान और गांव स्तर की बैंकिंग सेवाओं के साथ मिलकर यह व्यवस्था देश में डिजिटल और समावेशी बैंकिंग को और मजबूत बना रही है।