जियो प्लेटफॉर्म्स IPO: 5.5 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन, निवेशकों का जबरदस्त उत्साह और लिस्टिंग संभावनाएं
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल आर्म जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक बड़ा अध्याय साबित हो रहा है। 21 अक्टूबर 2026 को खुला यह इश्यू महज 100 मिनट में पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया था। दूसरे दिन यानी 22 अक्टूबर को कुल सब्सक्रिप्शन लगभग 5.5 से 5.57 गुना पहुंच गया। तीसरे और अंतिम दिन 23 अक्टूबर को मांग और तेज हुई। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार दोपहर तक यह 6.5 गुना से लेकर 11 गुना के आसपास पहुंच चुका था। एक करोड़ से ज्यादा आवेदनों का आंकड़ा भी चर्चा में रहा। यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है, जिसमें कंपनी करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखती है। प्राइस बैंड 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर तय किया गया था। लॉट साइज 12 शेयर है, यानी खुदरा निवेशक को न्यूनतम लगभग 13,428 रुपये लगाने पड़ते हैं।
आईपीओ की मुख्य बातें
जियो प्लेटफॉर्म्स पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। यानी मौजूदा शेयरधारक कोई शेयर नहीं बेच रहे। रिलायंस इंडस्ट्रीज की इसमें बड़ी हिस्सेदारी बनी रहेगी। जुटाई गई रकम का बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम की कुछ उधारियों के भुगतान या पूर्व भुगतान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। बाकी सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए। एंकर निवेशकों ने पहले ही करीब 8,110 करोड़ रुपये का आवंटन लिया था। पब्लिक इश्यू 21 से 23 अक्टूबर तक खुला रहा। आवंटन 26 अक्टूबर के आसपास होने और 28 अक्टूबर को बीएसई-एनएसई पर लिस्टिंग होने की उम्मीद है।
दिन-दर-दिन सब्सक्रिप्शन का हाल
पहले दिन इश्यू लगभग 3 से 3.16 गुना सब्सक्राइब हुआ। क्यूआईबी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स) श्रेणी में मांग सबसे तेज रही। दूसरे दिन कुल सब्सक्रिप्शन 5.5 गुना के पार निकल गया। क्यूआईबी हिस्से में 13 गुना के आसपास, एनआईआई में 5-6 गुना और रिटेल में 1.5 गुना से ऊपर की मांग दर्ज हुई। तीसरे दिन सुबह से ही बोलियां तेज रहीं। दोपहर तक कुल सब्सक्रिप्शन कई रिपोर्ट्स में 6.5 से 11 गुना के बीच दिखा। क्यूआईबी में 20 गुना से ज्यादा और रिटेल में 2 गुना से ऊपर की मांग देखने को मिली। कुल मिलाकर संस्थागत निवेशकों का भरोसा साफ झलकता है।
निवेशकों में उत्साह क्यों?
जियो प्लेटफॉर्म्स सिर्फ टेलीकॉम कंपनी नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी, क्लाउड, एआई और अन्य डिजिटल सेवाओं का प्लेटफॉर्म है। भारत में डेटा की बढ़ती खपत, 5जी नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास ने इस इश्यू को आकर्षक बनाया। कई बड़े घरेलू और विदेशी संस्थानों ने बोली लगाई। रिटेल निवेशकों ने भी अच्छा रुझान दिखाया, हालांकि संस्थागत मांग ज्यादा मजबूत रही। ग्रे मार्केट प्रीमियम (जीएमपी) लगभग 240-250 रुपये के आसपास रहा। इससे लिस्टिंग पर 21-22 प्रतिशत प्रीमियम का संकेत मिलता था। हालांकि जीएमपी अनौपचारिक होता है और वास्तविक लिस्टिंग प्राइस इससे अलग हो सकता है। बाजार की सामान्य स्थिति, वैश्विक रुझान और कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर भी निर्भर करता है।
लिस्टिंग संभावनाएं और आगे की राह
28 अक्टूबर को लिस्टिंग तय है। मजबूत सब्सक्रिप्शन और एंकर समर्थन से बाजार में सकारात्मक माहौल दिख रहा है। लेकिन निवेशकों को याद रखना चाहिए कि आईपीओ में लिस्टिंग गेन की कोई गारंटी नहीं होती। लंबी अवधि में कंपनी का प्रदर्शन, डेटा ग्रोथ, एआरपीयू (एवरेज रेवेन्यू पर यूजर) और डिजिटल बिजनेस का विस्तार अहम रहेगा।
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कंपनी की पृष्ठभूमि (संक्षिप्त)
जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस की डिजिटल सेवाओं वाली इकाई है। इसमें टेलीकॉम, ब्रॉडबैंड, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और संबंधित बिजनेस शामिल हैं। कंपनी भारत में सबसे बड़े वायरलेस ऑपरेटरों में से एक है और डिजिटल सेवाओं में तेजी से विस्तार कर रही है। आईपीओ के जरिए यह अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य के निवेश के लिए संसाधन जुटाना चाहती है।
महत्वपूर्ण तारीखें
सब्सक्रिप्शन: 21 से 23 अक्टूबर 2026
आवंटन: लगभग 26 अक्टूबर
रिफंड और डीमैट क्रेडिट: 27 अक्टूबर के आसपास
लिस्टिंग: 28 अक्टूबर 2026 (बीएसई और एनएसई)
निवेशकों के लिए ध्यान रखने वाली बातें
आईपीओ में आवेदन करने वाले खुदरा निवेशकों को लॉटरी सिस्टम से आवंटन होता है। ज्यादा सब्सक्रिप्शन होने पर आवंटन की संभावना कम हो जाती है। लंबी अवधि के निवेशक कंपनी के बिजनेस मॉडल, प्रतिस्पर्धा और रेगुलेटरी माहौल को ध्यान में रखकर फैसला लें। यह कोई निवेश सलाह नहीं है।
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जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ ने निवेशकों के बीच काफी उत्साह पैदा किया है। मजबूत संस्थागत भागीदारी और रिकॉर्ड स्तर के आवेदनों ने इसे यादगार बना दिया। लिस्टिंग के बाद बाजार का रुख और कंपनी का प्रदर्शन ही तय करेगा कि यह उत्साह कितना टिकाऊ साबित होता है। आगे की खबरों के लिए जर्नलिस्ट डेस्क पर नजर बनाए रखें।







