पूर्वजों की स्मृति से भविष्य की पीढ़ियों तक : देववाणी वेदविद्यापीठ में पर्यावरण संरक्षण का संकल्प
राजकुमार जैन
भारत विकास परिषद ने रोपे फलदार और औषधीय पौधे; वैदिक परंपरा, पर्यावरण चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का संगम बना आयोजनवृक्षारोपण यदि केवल पौधे लगाने का कर्मकांड न रहकर आने वाली पीढ़ियों के प्रति उत्तरदायित्व का संकल्प बन जाए, तो उसका अर्थ कहीं व्यापक हो जाता है। लोकमान्य नगर स्थित देववाणी वेदविद्यापीठ में भारत विकास परिषद, अहिल्यानगरी शाखा द्वारा आयोजित वृहद् पौधरोपण कार्यक्रम इसी व्यापक पर्यावरण चेतना का परिचायक बना। श्रावण मास में आयोजित यह कार्यक्रम परिषद की इस वर्ष की पौधरोपण श्रृंखला की तीसरी कड़ी थी।अध्यक्ष संजय मेहता के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में विद्यापीठ की उपजाऊ भूमि पर फलदार और औषधीय प्रजातियों के पौधे रोपे गए। परिषद के उपाध्यक्ष पर्यावरण राजकुमार जैन ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल परिसर को हरा-भरा करना नहीं, बल्कि ऐसी जीवंत हरित संपदा विकसित करना है, जो आने वाले वर्षों में विद्यापीठ में अध्ययनरत बटुकों के लिए फल, सब्जियों और औषधीय वनस्पतियों का आधार बन सके। पौधों की नियमित सिंचाई और दीर्घकालिक देखभाल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।कार्यक्रम का शुभारंभ संस्कार प्रमुख रश्मि शर्मा के नेतृत्व में वैदिक विधि-विधान से हुआ। विद्यापीठ के वेदपाठी ब्राह्मणों ने रुद्राक्ष के पौधे का पूजन और आरती की। आयोजन में 80 वर्षीय कुंजबाला नीमा से लेकर परिषद परिवार के बच्चों तक ने पौधरोपण में सहभागिता की। यह दृश्य पर्यावरण संरक्षण को संस्कार और पीढ़ियों के संवाद से जोड़ता दिखाई दिया।कार्यक्रम प्रभारी किशोर कोठारी के अनुसार, परिषद सदस्यों और नागरिकों ने अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधे समर्पित किए। कलकत्ता, राजमुंदरी और पुणे से लाए गए 6 से 8 फीट ऊंचाई के विकसित पौधों में आम, जाम, चीकू, आंवला, इमली, नीम, इंसुलिन, रुद्राक्ष, सीताफल, संतरा, कागदी नींबू, कमरख, चेरी, अंजीर और जामुन जैसी विविध प्रजातियां शामिल थीं। इनका चयन विद्यापीठ की भावी आवश्यकताओं और स्थानीय पर्यावरणीय उपयोगिता को ध्यान में रखकर किया गया।इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का एक दूसरा पक्ष भी सामने आया। युवा समकित जैन और प्रतीक सिकची ने बिना किसी औपचारिक आग्रह के परिसर में बिखरा एक बोरी से अधिक प्लास्टिक और अन्य कचरा एकत्र कर निर्धारित स्थान पर पहुंचाया। सचिव गौरव माहेश्वरी ने कहा कि पौधरोपण के साथ स्वच्छता के प्रति यह स्वप्रेरित पहल इस बात का संकेत थी कि पर्यावरण संरक्षण केवल वृक्ष लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि अपने आसपास के पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार का नाम भी है।आयोजन को सफल बनाने में अजय-सीमा माहेश्वरी का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में प्रो. अंजना जैन, श्रद्धा मेहता, पंखुरी माहेश्वरी, विमलादेवी आर्य, सुदर्शन-प्रफुल्ल जटाले, राष्ट्रीय संपर्क टोली के सदस्य मनीष बिसानी, हरि-रेखा सिकची, शंकर हरियाणी, पवित्र जैन, अनिल-अनीता नीमा, गगन-रुपाली गुप्ता, अजय शर्मा, योगेश-रश्मि केवड़ा और मनीष नीमा सहित परिषद के सदस्य एवं नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सदस्य परिवारों और बटुकों का आभार राजेंद्र आर्य ने व्यक्त किया।यह आयोजन इस विचार को रेखांकित करता है कि वृक्ष केवल पर्यावरण का हिस्सा नहीं, बल्कि पीढ़ियों के बीच जीवंत विरासत भी हैं—जिन्हें एक पीढ़ी रोपती है और आने वाली पीढ़ियां उनका फल, छाया और जीवन प्राप्त करती हैं।
