जिनवाणी ज्ञान गंगा : भाषा और संस्कारों के सेतु निर्माण की अभिनव पहलऑनलाइन क्लासेज के मध्यंबसे सिखाई जा रही है हिंदी भाषा
मनोज जैन नायक
निर्यापक श्रमण मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं जैन इंटरनेशनल एकता ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग से संचालित ‘जिनवाणी ज्ञान गंगा ऑनलाइन क्लासेस’ आज ज्ञान, भाषा और संस्कारों के प्रसार की एक प्रेरणादायी पहल बनकर उभर रही हैं। यह केवल एक सामान्य शिक्षण कक्षा नहीं, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले उन लोगों के लिए ज्ञान का ऐसा सेतु है, जो हिंदी बोलना, पढ़ना और लिखना सीखना चाहते हैं।
‘जिनवाणी ज्ञान गंगा ऑनलाइन क्लासेस’ के माध्यम से विद्यार्थियों को सरल एवं सहज पद्धति से मात्र दो माह में हिंदी बोलना, पढ़ना और लिखना सिखाने का प्रयास किया जा रहा है। तकनीक के माध्यम से शिक्षा को घर-घर तक पहुंचाने की यह पहल आज भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व में अपनी एक अलग पहचान बना रही है।
वर्तमान में इस कक्षा में लगभग डेढ़ सौ विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। देश-विदेश के विभिन्न स्थानों से विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर हिंदी भाषा का अध्ययन कर रहे हैं। आगामी 20 अगस्त से जिनवाणी ज्ञान गंगा ऑनलाइन क्लासेस का नया बैच प्रारंभ होने जा रहा है, जिसे लेकर विद्यार्थियों में विशेष उत्साह है। इस कक्षा की विशेषता यह है कि यहां भाषा केवल शब्दों और व्याकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंदी के माध्यम से भारतीय संस्कृति, संस्कार और अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर भी प्रदान किया जाता है। देश-विदेश के विभिन्न स्थानों से जुड़े योग्य एवं अनुभवी शिक्षक विद्यार्थियों को सरल, सहज और प्रभावी पद्धति से अध्ययन कराते हैं।
जिनवाणी ज्ञान गंगा का उद्देश्य केवल हिंदी भाषा का ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के प्रति रुचि जागृत करना भी है। इसी उद्देश्य को व्यापक रूप प्रदान करते हुए आगामी समय में इस मंच के माध्यम से स्पोकन इंग्लिश, स्पोकन संस्कृत, जैन दर्शन सहित विभिन्न विषयों की कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी।
आज जब आधुनिकता की तेज गति में अनेक लोग अपनी भाषा और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे समय में जिनवाणी ज्ञान गंगा जैसी पहल निश्चित रूप से आशा की एक उज्ज्वल किरण है। यह अभियान उन लोगों को अपनी भाषा से जोड़ रहा है, जो हिंदी बोलना, पढ़ना और लिखना सीखने की इच्छा रखते हैं।
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, वह हमारी संस्कृति, हमारी स्मृतियों और हमारी पहचान की संवाहक होती है। इसलिए हिंदी को सीखने और सिखाने का यह प्रयास वास्तव में भारतीय संस्कृति को सहेजने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद, जैन इंटरनेशनल एकता ऑर्गेनाइजेशन के सहयोग, शिक्षकों के समर्पण और विद्यार्थियों की लगन से जिनवाणी ज्ञान गंगा ऑनलाइन क्लासेस निरंतर विस्तार की ओर अग्रसर हैं। दो माह में हिंदी बोलना, पढ़ना और लिखना सीखने की यह पहल आने वाले समय में विश्व के अनेक देशों तक पहुंचे और भारतीय भाषा, संस्कृति एवं संस्कारों की ज्योति प्रज्वलित करे यही इस पुनीत अभियान की सार्थकता है।
