मजबूत परिवार ही नशे के खिलाफ सबसे बड़ी ढाल
प्रख्यात समाजसेवी, लेखक एवं विचार मंच के प्रतिनिधि राजकुमार जैन (अरेओभिया) ने अपने जन्मदिन को सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान के युवाओं के बीच रहकर नशामुक्त समाज का संदेश दिया। कार्यक्रम के।दौरान आयोजित की गई ओपन माइक प्रतियोगिता में उन्होंने निर्णायक (जज) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी निभाई।
इस अवसर पर राजकुमार जैन ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून या चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक ताने-बाने से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार मजबूत हो जाएं तो नशे की समस्या काफी हद तक स्वतः समाप्त हो सकती है।
उन्होंने कहा, “व्यक्ति अक्सर अपनी खुशी को बढ़ाने या तनाव और दुख से राहत पाने के लिए नशे का सहारा लेता है, जबकि उसका वास्तविक समाधान किसी नशीले पदार्थ में नहीं, बल्कि अपने परिवार के स्नेह, संवाद और भावनात्मक सहयोग में छिपा है।”
राजकुमार जैन ने कहा कि बचपन में प्रत्येक बच्चा अपनी हर छोटी-बड़ी खुशी और परेशानी सबसे पहले अपने परिवार से साझा करता है। लेकिन जैसे-जैसे परिवारों में संवाद कम होता जाता है, बच्चों और युवाओं के भीतर भावनात्मक खालीपन बढ़ने लगता है। यही खालीपन उन्हें गलत संगति और नशे जैसी विनाशकारी आदतों की ओर धकेल देता है।
उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती ‘कम्युनिकेशन गैप’ है। आधुनिक जीवनशैली में परिवार एक साथ रहते हुए भी भावनात्मक रूप से दूर होते जा रहे हैं। यदि माता-पिता प्रतिदिन बच्चों के साथ खुलकर संवाद करें, उनकी बातें सुनें और बिना किसी डर के अपनी भावनाएं व्यक्त करने का वातावरण दें, तो नशे की शुरुआत होने से पहले ही उसे रोका जा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नशामुक्त समाज का सबसे प्रभावी मॉडल परिवार से शुरू होता है। बच्चों को केवल नशे के दुष्परिणाम बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसा प्रेमपूर्ण, सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण देना होगा, जहां वे हर परिस्थिति में अपने परिवार को ही अपना सबसे बड़ा सहारा समझें।
अपने संदेश के अंत में राजकुमार जैन ने कहा कि आज समाज नशे के दुष्परिणामों से भली-भांति परिचित है। अब समय केवल जागरूकता फैलाने का नहीं, बल्कि परिवार, समाज, शिक्षण संस्थानों और कॉर्पोरेट जगत को मिलकर ऐसे वातावरण का निर्माण करने का है, जहां संवाद, विश्वास और संस्कार नशे के विरुद्ध सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बन सकें।
उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि “आइए, जन्मदिन, उत्सव और सामाजिक आयोजनों को केवल खुशी मनाने का अवसर न बनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम भी बनाएं।”
