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BRICS संस्कृति सम्मेलन: क्या भोपाल बनेगा वैश्विक सांस्कृतिक कूटनीति का नया केंद्र?

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डॉ मनीष मेहता

भारत की पहचान केवल एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि विश्व की सबसे प्राचीन और जीवंत सभ्यताओं में से एक के रूप में भी रही है। ऐसे समय में जब विश्व बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, भोपाल में 5 से 8 अगस्त तक आयोजित होने वाला BRICS संस्कृति सम्मेलन केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर और सांस्कृतिक कूटनीति का प्रभावशाली प्रदर्शन है।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल, जिसे झीलों का शहर और भारत की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में भी जाना जाता है, इस सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी नई पहचान स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है। BRICS देशों के कलाकारों, सांस्कृतिक विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और विद्वानों का एक मंच पर आना यह दर्शाता है कि आज संस्कृति केवल विरासत का विषय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।

BRICS और संस्कृति का बदलता स्वरूप
BRICS (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका तथा नए सदस्य देशों) की स्थापना मूलतः आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से हुई थी। लेकिन समय के साथ इस समूह ने शिक्षा, विज्ञान, स्वास्थ्य, पर्यटन और संस्कृति को भी सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बनाया है।

आज वैश्विक राजनीति में केवल सैन्य शक्ति या आर्थिक सामर्थ्य पर्याप्त नहीं मानी जाती। किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत, उसकी कला, साहित्य, संगीत, लोक परंपराएं और जीवन दर्शन भी उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा निर्धारित करते हैं। यही कारण है कि BRICS देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को नई प्राथमिकता मिल रही है।

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त माध्यम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले एक दशक में योग, आयुर्वेद, भारतीय भाषाओं, शास्त्रीय संगीत, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से लेकर G20 और अब BRICS जैसे मंचों पर भारत लगातार यह संदेश दे रहा है कि वैश्विक विकास केवल आर्थिक आंकड़ों से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक साझेदारी से भी संभव है। भोपाल सम्मेलन इसी सोच का विस्तार प्रतीत होता है।

मध्यप्रदेश सरकार के लिए अवसर
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार
लगातार धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।

BRICS संस्कृति सम्मेलन से मध्यप्रदेश को अनेक स्तरों पर लाभ मिल सकते हैं—

सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिलेगी।

स्थानीय कलाकारों और लोक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच प्राप्त होगा।

होटल, परिवहन और सेवा क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

विदेशी प्रतिनिधियों के माध्यम से निवेश और सांस्कृतिक सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे।

भोपाल की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी।

यदि सरकार इस आयोजन के बाद भी सांस्कृतिक आदान-प्रदान की निरंतर व्यवस्था बनाए रखती है तो यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी सकारात्मक साबित हो सकता है।

भोपाल क्यों है उपयुक्त स्थल?
भोपाल केवल प्रशासनिक राजधानी नहीं है। यहां स्थित संग्रहालय, जनजातीय संस्कृति, भारत भवन, संगीत और रंगमंच की समृद्ध परंपरा, पुरातात्विक धरोहर तथा विविध सांस्कृतिक संस्थान इसे देश के प्रमुख सांस्कृतिक नगरों में स्थान दिलाते हैं। यही कारण है कि BRICS जैसा सम्मेलन भोपाल को विश्व सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान दिला सकता है।

सिर्फ आयोजन नहीं, स्थायी नीति की आवश्यकता
भारत में अक्सर बड़े आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो जाते हैं, लेकिन उनके परिणामों को दीर्घकालिक नीति में परिवर्तित करने की गति अपेक्षाकृत धीमी रहती है।

यदि इस सम्मेलन के बाद—

सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम नियमित हों,

कलाकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप बने,

विश्वविद्यालयों के बीच सांस्कृतिक अनुसंधान बढ़े,

लोक कलाओं का डिजिटलीकरण हो,

और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए साझा BRICS प्लेटफॉर्म विकसित किया जाए, तो यह सम्मेलन वास्तव में ऐतिहासिक सिद्ध होगा।

चुनौतियां भी कम नहीं
भारत के सामने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, स्मारकों के रखरखाव, लोक कलाकारों की आर्थिक स्थिति, पारंपरिक कलाओं के संरक्षण तथा नई पीढ़ी को सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने जैसी गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं।

यदि ऐसे सम्मेलन केवल औपचारिक भाषणों तक सीमित रह जाएं, तो उनका प्रभाव सीमित रहेगा। आवश्यकता इस बात की है कि यहां हुए विमर्श को ठोस योजनाओं और क्रियान्वयन से जोड़ा जाए।

वैश्विक संदेश
विश्व आज युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और सांस्कृतिक संघर्षों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में BRICS संस्कृति सम्मेलन यह संदेश देता है कि संवाद, विविधता और सांस्कृतिक सम्मान ही स्थायी शांति और सहयोग का मार्ग हैं।

भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की अवधारणा इसी भावना का विस्तार है, जहां विविध संस्कृतियां प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग का आधार बनती हैं।

और अंत में
भोपाल में आयोजित BRICS संस्कृति सम्मेलन केवल चार दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक नेतृत्व क्षमता की परीक्षा भी है। यदि केंद्र सरकार, मध्यप्रदेश सरकार, सांस्कृतिक संस्थान और नागरिक समाज मिलकर इस अवसर को दीर्घकालिक सांस्कृतिक रणनीति में बदलते हैं, तो भोपाल आने वाले वर्षों में वैश्विक सांस्कृतिक संवाद का स्थायी केंद्र बन सकता है।

आर्थिक शक्ति किसी राष्ट्र को समृद्ध बना सकती है, लेकिन संस्कृति ही उसे विश्व में सम्मान दिलाती है। BRICS संस्कृति सम्मेलन भारत को यही अवसर प्रदान कर रहा है कि वह अपनी हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता को आधुनिक विश्व व्यवस्था के साथ जोड़ते हुए सांस्कृतिक नेतृत्व की नई इबारत लिखे।

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