नशा मुक्त युवा–विकसित भारत संकल्प अभियान का राज्य स्तरीय शुभारंभ
देश को मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों से मुक्त कराने तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रविवार को ‘नशा मुक्त युवा–विकसित भारत संकल्प अभियान 2026’ का देशव्यापी वर्चुअल शुभारंभ किया गया। अभियान के अंतर्गत भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) में राज्य स्तरीय भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के 10,000 से अधिक केंद्रों पर वर्चुअली जुड़े एक करोड़ से अधिक युवाओं, स्वयंसेवकों और विभिन्न संगठनों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत@2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए देश का नशा मुक्त होना अत्यंत आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, “युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। नशा केवल एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को दीमक की तरह खोखला कर देता है। ‘माय भारत’ डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं को सही दिशा देने, उनकी क्षमता को पहचानने तथा नशा मुक्ति के इस जन-आंदोलन का नेतृत्व करने का सशक्त माध्यम बनेगा।”
इस अवसर पर अगले 100 सप्ताह तक चलने वाले ‘संडे स्पेशल’ महाअभियान की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। अभियान के अंतर्गत प्रत्येक रविवार को खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, मैराथन, नुक्कड़ नाटक तथा विभिन्न जन-जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।
मैनिट परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के नशा मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण तथा युवाओं को स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवनशैली से जोड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से स्वयं नशा मुक्ति का संकल्प लेने तथा अपने आसपास कम से कम पांच अन्य युवाओं को ‘माय भारत’ पोर्टल पर पंजीकृत कर अभियान का ‘नशा मुक्ति स्वयंसेवक’ बनाने का आह्वान किया।
खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा माय भारत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस गरिमामयी कार्यक्रम में प्रदेश के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की।
