सीपीआर देकर कार्डियक अरेस्ट से बचाए जान
एम्स भोपाल में विगत 21 जुलाई को भारतीय शिशु रोग अकादमी (आईएपी) के सीपीआर दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों, पैरामेडिकल कर्मियों तथा अस्पताल कर्मचारियों के लिए कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को हृदयाघात जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक कौशल से सशक्त बनाना था।
भोपाल के होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में आयोजित प्रशिक्षण सत्र का संचालन एम्स भोपाल के शिशु रोग विभाग के प्रो. डॉ. गिरिश चंद्र भट्ट ने किया, जो आईएपी एडवांस एवं बेसिक लाइफ सपोर्ट समूह के सह-संयोजक भी हैं। उन्होंने बाईस्टैंडर सीपीआर की मूलभूत जानकारी देते हुए बताया कि यदि कार्डियक अरेस्ट होने के तुरंत बाद गोल्डन मिनट्स में सीने पर दबाव (चेस्ट कम्प्रेशन) शुरू कर दिया जाए, तो मरीज के जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 85 प्रतिशत कार्डियक अरेस्ट घर पर होते हैं, इसलिए आम नागरिकों को कार्डियक अरेस्ट की शीघ्र पहचान, सही तरीके से चेस्ट कम्प्रेशन करना तथा प्रारंभिक सहायता देना अवश्य आना चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। कार्यक्रम का समन्वय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, भोपाल के डॉ. निशांत नंबीसन ने किया।
एम्स भोपाल द्वारा आयोजित सभी प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कुल 350 लोगों को सीपीआर का प्रशिक्षण दिया गया। इनमें स्कूली विद्यार्थी, होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के छात्र, तकनीशियन, परियोजना कर्मचारी तथा अस्पताल के अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
