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PM नरेंद्र मोदी के मिशन लाइफ, ऊर्जा बचत और प्लास्टिक मुक्त जीवन से पर्यावरण संरक्षण को रोजमर्रा की आदत बनाने की शिवराज ने की अपील

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धरती के तापमान को संतुलित रखने की ढाल, पक्षियों, कीट–पतंगों और असंख्य जीवों का घर और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षा कवच हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि जब वे पेड़ लगाते हैं और उसे बड़ा होते देखते हैं, तो उन्हें ऐसा लगता है जैसे वे धरती को गले लगा रहे हों- यह भावना ही वृक्ष मित्र आंदोलन की आत्मा है।

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हर साल एक पेड़ लगाने का संकल्प, वृक्ष मित्र पाँच नए साथी जोड़ेंगे 

शिवराज सिंह चौहान ने पूरे कार्यक्रम को सिर्फ भाषण तक सीमित न रखते हुए स्पष्ट कहा कि आज यहाँ से तय करके उठना है कि हम क्या करेंगे। उन्होंने अनेक वृक्ष मित्रों से सुझाव लेते हुए बेहद सीधा और सरल संकल्प रखा- साल में कम से कम एक पेड़ लगाना और कम से कम पाँच नए लोगों को पेड़ लगाने के अभियान से जोड़ना। उन्होंने सुझाव दिया कि कोई भी व्यक्ति अपने जन्मदिन, शादी की सालगिरह, बच्चों के जन्मदिन या माता–पिता की पुण्य स्मृति जैसे अवसरों पर एक पेड़ जरूर लगाए, यही व्यक्तिगत कदम आगे चलकर सामूहिक ताकत बनेंगे। उनके साथ हॉल में मौजूद सभी वृक्ष मित्रों ने इस बारे में संकल्प लिया। श्री चौहान ने कहा कि यही वह ऊर्जा है जो धीरे–धीरे पूरे देश में फैलकर जनआंदोलन बनेगी। उन्होंने वर्चुअल जुड़े साथियों को भी इस संकल्प में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और स्पष्ट संदेश दिया कि अगर हर नागरिक साल में एक पेड़ लगाए और पाँच लोगों को प्रेरित करे, तो आने वाले कुछ ही वर्षों में हरित भारत का चित्र बहुत बदल सकता है।

‘वृक्ष मित्र परिवार’ का राष्ट्रीय ढांचा बनेगा, राष्ट्रस्तरीय अभियान

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने घोषणा की कि वृक्षारोपण के प्रयासों को बिखरे हुए और अलग–अलग पहल के रूप में नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि “वृक्ष मित्र परिवार” के नाम से एक संगठित नेटवर्क बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह कोई संगठन नहीं, बल्कि एक परिवार होगा- भाई–बहन, बेटे–बेटियाँ, मामा–भांजे–भांजियाँ जो पेड़ लगाने और बचाने के लिए एक साझा भाव से जुड़े होंगे। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि वृक्ष मित्र परिवार की राष्ट्रीय इकाई बने, फिर हर राज्य, हर ज़िले, हर ब्लॉक और आगे चलकर गाँव स्तर तक इसकी इकाइयाँ बनाई जाएँ, ताकि योजना, मॉनिटरिंग और समन्वय आसान हो सके। उन्होंने कहा कि जब संरचना ऊपर से नीचे तक जुड़ जाएगी, तब हर क्षेत्र में पेड़ लगाने के लक्ष्य तय किए जा सकेंगे, उनकी देखभाल की जिम्मेदारी तय हो सकेगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वृक्षारोपण केवल एक बार की फोटो–इवेंट नहीं, बल्कि सतत अभियान बन जाए।

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हरियाली अमावस्या पर देशव्यापी वृक्षारोपण

शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय संस्कृति में पेड़ और जल के महत्व का उल्लेख करते हुए “हरियाली अमावस्या” को विशेष रूप से याद दिलाया। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा ने पहले ही पेड़, तालाब और जलाशय को पुत्र से भी अधिक महत्व दिया है- “एक वृक्ष दस पुत्रों के बराबर” जैसी कथन हमारी सोच का प्रमाण हैं। इसी सांस्कृतिक आधार पर उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इस वर्ष 12 अगस्त को आने वाली हरियाली अमावस्या पर वृक्ष मित्र परिवार का पहला बड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम होगा। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि इस दिन देशभर में जुड़े सभी वृक्ष मित्र अपने–अपने क्षेत्र में एक–एक पेड़ अवश्य लगाएंगे और धीरे–धीरे यह दिन पूरे देश में “पेड़ पर्व” के रूप में जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर हम अपने सांस्कृतिक त्योहारों को पर्यावरण से जोड़ दें- जैसे हरियाली अमावस्या पर वृक्षारोपण, विश्व पर्यावरण दिवस पर पौधे बाँटना, स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर पेड़ लगाना तो आने वाले कुछ वर्षों में करोड़ों नए पेड़ धरती पर खड़े होंगे और यह हमारी संस्कृति और पर्यावरण दोनों को मजबूत बनाएगा।

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पंचायतों और नगर निकायों में पेड़ लगाने के साथ सुरक्षा की भी गारंटी

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेड़ लगाने से अधिक पेड़ की सुरक्षा पर ज़ोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि आज सबसे बड़ा संकट यह है कि कहीं पेड़ तो लगा दिए जाते हैं, फोटो भी खिंच जाती है, लेकिन कोई यह देखने वापस नहीं जाता कि पेड़ जिंदा है या नहीं, उसे पानी मिल रहा है या नहीं, उसे जानवरों से बचाया गया या नहीं। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति बदलनी होगी- पेड़ लगा देना नहीं, बड़ा करना लक्ष्य होना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने सुझाव दिया कि हर पंचायत अपने क्षेत्र में दो–तीन एकड़ भूमि चिन्हित कर “वृक्ष मित्र स्थल” बनाए, जहाँ नियमित रूप से पेड़ लगें और उनकी देखभाल सामूहिक जिम्मेदारी बने। इसी तरह, हर नगर पंचायत, नगर निगम और शहरी निकाय भी अपने–अपने क्षेत्र में कई स्थान तय करे, जहाँ वृक्षारोपण किया जाए और उसकी निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि जब पंचायत और नगर निकाय जगह और व्यवस्था देंगे और वृक्ष मित्र परिवार पेड़ और देखभाल की जिम्मेदारी लेगा, तब पेड़ सुरक्षित रहेंगे और हर साल लगने वाले पौधे वास्तव में हरित भारत की पूँजी बनेंगे।

भविष्य की कृषि और किसान के जीवन को सुरक्षित करने की पहल

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने पर्यावरण संरक्षण को सीधे कृषि और किसान के भविष्य से जोड़ा। उन्होंने कहा कि आज किसान के लिए सबसे बड़े सवाल केवल बीज और खाद नहीं हैं, बल्कि पानी की उपलब्धता, मिट्टी की गुणवत्ता और खेत की दीर्घकालिक सेहत हैं। उन्होंने यह भी संकेत किया कि असंतुलित रसायन प्रयोग और अंधाधुंध दोहन से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है, जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। उन्होंने जल और मिट्टी संरक्षण के लिए संतुलित उपयोग का संदेश दिया- जितना आवश्यक हो उतना ही दोहन, मिट्टी की सहन–शक्ति का सम्मान, और ऐसी खेती का विस्तार जिसमें धरती की सेहत भी बची रहे और किसान की आय भी सुरक्षित रहे। उन्होंने कहा कि खेत बचाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक भागीदारी दोनों की ज़रूरत है, ताकि भविष्य में कृषि उत्पादन और किसान का जीवन किसी बड़े पर्यावरणीय संकट के सामने असुरक्षित न रह जाए।

मिशन लाइफ, ऊर्जा बचत और प्लास्टिक मुक्त जीवन से पर्यावरण संरक्षण

केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment)” का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण के लिए जीवनशैली बदलना सबसे प्रभावी और स्थायी समाधान है। उन्होंने कहा कि कमरे से निकलते समय बिजली बंद करना, नल टपक रहा हो तो तुरंत ठीक कराना, पानी बर्बाद न करना, गीले–सूखे कचरे को अलग करना, प्लास्टिक की थैलियों से बचना और भोजन में मोटे अनाज व स्थानीय उत्पादों को शामिल करना- ये सब छोटे कदम हैं, लेकिन इनके प्रभाव बहुत बड़े हैं। शिवराज सिंह चौहान ने डॉ. अनूप हजेला द्वारा बताई गई ऊर्जा बचत उपायों से सहमति जताते हुए कहा कि LED लाइट्स, BLDc फैन, ऊर्जा कुशल एसी और रेफ्रिजरेटर का प्रयोग केवल बिल कम करने के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जैसे–जैसे इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ेगी, ऊर्जा उत्पादन और बचत दोनों ही बड़े मुद्दे बनेंगे, इसलिए अभी से हर घर, हर संस्थान में ऊर्जा बचत करने वाले उपकरणों को अपनाना और प्लास्टिक को जीवन से बाहर करना ज़रूरी है, तभी मिशन लाइफ का असली प्रभाव दिखेगा।

अनिल जोशी और डॉ. हजेला ने व्यवहार में बदलाव और ‘एक पेड़ पालने’ का संदेश दिया

पद्म भूषण पर्यावरणविद् अनिल जोशी ने शिवराज सिंह चौहान के वृक्षारोपण संकल्प को केवल पेड़ लगाने की गतिविधि नहीं, बल्कि एक लंबा और प्रेरक विचार बताया। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान का जीवन और व्यवहार दिखाता है कि सत्ता में रहते हुए भी कोई व्यक्ति सादगी, संवेदनशीलता और प्रकृति–प्रेम के साथ काम कर सकता है और यही चीज उन्हें विशेष बनाती है। उन्होंने कहा कि वे वर्षों से शिवराज सिंह के काम को देख रहे हैं और उन्होंने पाया है कि उनके व्यक्तित्व में कोई स्वार्थी मोड़ नहीं, बल्कि लगातार समाज और पर्यावरण के लिए काम करने की वृत्ति है, जो सस्टेनेबिलिटी का मूल है। 

अनिल जोशी ने यह भी बताया कि IIT के वैज्ञानिकों ने शिवराज सिंह चौहान के वृक्षारोपण और पर्यावरणीय कार्यों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया है, जिसमें रिमोट सेंसिंग और अन्य तकनीकी साधनों से देखा जाएगा कि उनके लगाए पेड़ों और चलाए अभियान ने धरातल पर क्या बदलाव पैदा किए हैं। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन भविष्य में नीति–निर्माताओं, सामाजिक संगठनों और संसद में बैठे जनप्रतिनिधियों के लिए एक “स्टडी केस” होगा, जिससे वे समझ सकेंगे कि कैसे निरंतर, सादगीपूर्ण और जन–आधारित प्रयास से पर्यावरण में ठोस सुधार लाया जा सकता है।

प्रख्यात चिकित्सक और समाजसेवी डॉ. अनूप हजेला ने क्लाइमेट चेंज और सस्टेनेबिलिटी को बेहद सरल भाषा में समझाते हुए कहा कि दुनियाभर में बढ़ती गर्मी, फेल होते सिस्टम, रुकती परेड और टूटती स्वास्थ्य–व्यवस्थाएँ दिखाती हैं कि यह संकट किसी एक देश या शहर तक सीमित नहीं है। उन्होंने ऊर्जा बचत, पानी के Reduce– Reuse– Recycle मॉडल, ग्रे–वॉटर के उपयोग, पेपर और प्लास्टिक के कम से कम प्रयोग और रीसाइक्लिंग को क्लाइमेट चेंज से निपटने के प्रमुख वर्टिकल बताया।

डॉ. हजेला ने “एक पेड़ लगाओ, एक पेड़ पालो” का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग फ्लैट में रहते हैं और नई जमीन पर पेड़ नहीं लगा सकते, वे भी रोज कहीं जाते–आते किसी एक छोटे पौधे को अपना मानकर उसे रोज पानी दें, उसकी देखभाल करें और उसे बड़े पेड़ में बदलते देखें- यही सच्ची सस्टेनेबिलिटी है। उन्होंने अपने अस्पताल की मिसाल दी कि वहाँ वे विश्व पर्यावरण दिवस, 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे मौकों पर सैकड़ों फलदार पौधे बाँटते हैं, ताकि हर सैपलिंग कहीं न कहीं धरती पर लगकर पेड़ बन सके। उन्होंने यह भी कहा कि अगर देश के अधिक से अधिक संस्थान “ग्रीन सर्टिफिकेशन” की दिशा में काम करें, तो ऊर्जा, पानी, कचरा और प्लास्टिक के उपयोग में व्यापक सुधार संभव है और इससे पर्यावरण संरक्षण को संस्थागत मजबूती मिलेगी।

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