31 राज्यों में लगाए गए 50 हजार से ज्यादा पेड़
हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर देशभर में एक बड़ा हरित संदेश दिया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में “वृक्ष मित्र परिवार” के साथ 31 राज्यों में 50,000 से ज्यादा पेड़ लगाए गए। इस अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ माँ के नाम” आह्वान ने और भी मजबूत बनाया। दिल्ली के पीबीजी ग्राउंड, सेंट्रल रेंज, तालकटोरा स्टेडियम के पास हुए मुख्य कार्यक्रम में मंत्रीगण, सांसद, अधिकारी, किसान, युवा और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत पौधों में जल अर्पण और वंदे मातरम् के साथ हुई और सामूहिक पौधारोपण किया गया। दिल्ली के अलावा देशभर के गांवों, कस्बों, पंचायतों और संस्थानों में भी लोगों ने उत्साह से पौधे लगाए। इस पूरे अभियान में वृक्ष मित्र परिवार ने अहम भूमिका निभाई और हर व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने के लिए प्रेरित किया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि हरियाली अमावस्या सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में मनुष्य, पशु, पक्षी, नदियाँ, पर्वत और पेड़-पौधे सब एक ही चेतना से जुड़े हैं। उनके अनुसार, जब हम पेड़ लगाते हैं तो सिर्फ हरियाली नहीं बढ़ाते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पेड़ लगाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उनके संरक्षण और देखभाल का संकल्प लेना।
शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से अपील की कि हर नागरिक साल में कम से कम एक पेड़ जरूर लगाए और अपने साथ पाँच और लोगों को इस मुहिम से जोड़े। उन्होंने कहा कि जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों के जन्म और माता-पिता की पुण्य स्मृति जैसे अवसरों को “वृक्ष पर्व” के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने पंचायतों, नगर निकायों और संस्थानों से भी कहा कि पौधारोपण के लिए तय स्थान बनाए जाएं, ताकि पौधों की सुरक्षा और नियमित देखभाल सुनिश्चित हो सके।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि पर्यावरण बिगड़ने का असर सीधे खेती, पानी, मिट्टी और लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि किसान के लिए आज सबसे बड़ा मुद्दा सिर्फ बीज और खाद नहीं, बल्कि पानी की उपलब्धता और जमीन की सेहत भी है। उन्होंने कहा कि मिशन लाइफ, ऊर्जा बचत और प्लास्टिक मुक्त जीवन को अपनाकर ही पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है। उनके अनुसार, प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि संतुलित उपयोग और संरक्षण ही सही रास्ता है।
