बच्चों के विदेश चले जाने पर माँ बाप की व्यथा बताता नाटक संध्या छाया
आनंदमोहन माथुर चैरिटेबल ट्रस्ट के सौजन्य से रंगमंच आर्ट ऑफ़ ड्रामा द्वारा आनंद मोहन माथुर सभागृह में सुप्रसिद्ध मराठी नाटककार जयवंत दलवी द्वारा लिखित एवं संदीप दुबे द्वारा निर्देशित बेहद मार्मिक नाटक ‘संध्या छाया’ का मंचन किया गया!
यह नाटक आज के बदलते सामाजिक परिवेश की एक ऐसी संवेदनशील कहानी है, जो उन वृद्ध माता-पिता की पीड़ा, अकेलेपन और प्रतीक्षा को मंच पर जीवंत करती है, जिनके बच्चे उच्च शिक्षा या रोजगार के लिए विदेश जाते हैं और वहीं स्थायी रूप से बस जाते हैं। माता-पिता अपने बच्चों के लौटने की आस में दिन-प्रतिदिन उँगलियों पर समय गिनते रहते हैं। यह नाटक समाज के सामने एक कटु सत्य प्रस्तुत करते हुए पारिवारिक रिश्तों, भावनात्मक जुड़ाव और बुजुर्गों की उपेक्षा जैसे गंभीर विषयों पर सोचने के लिए प्रेरित करता है।
एक वृद्ध जोड़ा (नाना और नानी) जो अपने व्यस्क बच्चों के विदेश या दूर चले जाने के बाद घर में अकेले रह जाते हैं। बच्चों के प्रति प्रेम और बुढ़ापे में उनकी उपेक्षा के कारण उपजा अकेलापन।
‘संध्या छाया’ जीवन के ढलते हुए समय (संध्या) और उसमें अकेलेपन की लंबी होती परछाइयों (छाया) को दर्शाती है। यह जानकारी मीडिया प्रभारी प्रवीण जोशी ने दी। अतिथि स्वागत डॉ. राजकुमार माथुर डॉ. राहुल माथुर और कर्नल माथुर ने किया।
नाटक का प्रकाश संयोजन ओम कुमार तथा संगीत संयोजन प्रिया झाला द्वारा किया जाएगा।
मुख्य भूमिकाओं में संदीप दुबे ( पिता ), सपना जोशी ( माँ ), वेदांत विजयवर्गीय ( बड़ा बेटा ), ओपी सोमानी ( दादाजी ), देवेश श्रीवास्तव ( विनय), आदित्य जैन (श्याम), निर्मल जैन( पोस्टमैन ),लावण्या साहू (शर्मीला) एवं पुलकित त्रिपाठी( नौकर ) अपने अभिनय का जादू बिखेरा!संचालन रमेश बाबू विद्यार्थी ने किया
